कामयाबी के लिए कभी अंग प्रदर्शन का शॉर्ट कट नहीं अपनाया नंदा ने

मुंबई। अदाकारी के साथ-साथ सादगी, सौम्यता, सौंदर्य के दम पर साठ और सत्तर के दशक में नंदा ने फिल्म-प्रेमियों के दिलों पर राज किया। वे नूतन और साधना की परम्परा-शैली की अभिनेत्री थीं, जिन्होंने कामयाबी के लिए कभी अंग प्रदर्शन का शॉर्ट कट नहीं अपनाया। अपने दौर के मशहूर अभिनेता मास्टर विनायक का जब देहांत हुआ, तब उनकी पुत्री नंदा सिर्फ आठ साल की थीं। परिवार की कमजोर आर्थिक दशा ने नंदा को कम उम्र में फिल्मों की तरफ मोड़ दिया।

कई फिल्मों में बाल कलाकार की हैसियत से काम करने के बाद 'छोटी बहन' (1959) से वे नायिका के तौर पर उभरीं। एक के बाद एक हिट होती फिल्मों ने उनका सिक्का जमा दिया। बाद में वे चरित्र भूमिकाओं में भी नजर आईं। राज कपूर की 'प्रेम रोग' (1982) में उन्होंने पद्मिनी कोल्हापुरे की मां का किरदार अदा किया था। इस फिल्म के बाद उन्होंने एकाकी जीवन बिताया। मुम्बई में 25 मार्च, 2014 को 75 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया।

कई बड़े सितारों के साथ काम किया
नंदा ने देव आनंद, राज कपूर, शशि कपूर, धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, सुनील दत्त, राजेन्द्र कुमार, संजीव कुमार, जीतेंद्र, मनोज कुमार समेत उस दौर के सभी बड़े सितारों के साथ काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'भाभी', धूल का फूल, काला बाजार, कानून, हम दोनों, आशिक, जब जब फूल खिले, तीन देवियां, गुमनाम, धरती कहे पुकार के, 'इत्तफाक' और 'द ट्रेन' शामिल हैं।

बेशुमार सदाबहार गाने
नंदा पर कई सदाबहार गाने फिल्माए गए, जिनकी सूची खासी लम्बी है। इनमें कुछ प्रमुख हैं- इक प्यार का नग्मा है (शोर), ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे (जब जब फूल खिले), आहा रिमझिम के ये प्यारे-प्यारे गीत (उसने कहा था), अल्लाह तेरो नाम ईश्वर तेरो नाम (हम दोनों), लिखा है तेरी आंखों में (तीन देवियां), वादियां मेरा दामन (अभिलाषा), जा रे कारे बदरा (धरती कहे पुकार के), ये वादियां ये फिजाएं (आज और कल)।

शादी नहीं हो सकी
नंदा जब 53 साल की थीं, उन्होंने निर्देशक मनमोहन देसाई से सगाई की थी, लेकिन दोनों की शादी नहीं हो सकी। इमारत से गिर कर मनहोहन देसाई की मौत के बाद वे उम्रभर अविवाहित रहीं।

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